तृतीय लिंग समुदाय हेतु आयोजित कार्यशाला में BSP की ग्लैमिका पटेल ने दिखाई प्रभावशाली मेमोरी स्किल्स

BSP GLAMIKA PATEL

– DIGITAL BHILAI NEWS – 

“दुर्ग में आयोजित विशेष कार्यशाला में दिखी असाधारण प्रतिभा, मेमोरी स्किल्स ने सबको किया मंत्रमुग्ध”

  • छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में आयोजित एक विशेष सामाजिक कार्यक्रम ने न सिर्फ सहभागियों को प्रेरित किया, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि प्रतिभा किसी पहचान, वर्ग या लिंग की मोहताज नहीं होती।
  • समाज कल्याण विभाग, दुर्ग के तत्वावधान में आयोजित “तृतीय लिंग समुदाय हेतु विशेष जागरूकता एवं सशक्तिकरण कार्यशाला” में BSP की सुश्री ग्लैमिका पटेल ने अपनी असाधारण मेमोरी स्किल्स (Memory Skills) से सभी को चौंका दिया।
  • कार्यक्रम का आयोजन विवेकानंद ऑडिटोरियम, दुर्ग में किया गया, जहां बड़ी संख्या में अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, तृतीय लिंग समुदाय के सदस्य और आमजन उपस्थित रहे।
  • यह आयोजन रजत जयंती वर्ष 2025 के अंतर्गत किया गया था, जिसका उद्देश्य तृतीय लिंग समुदाय को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और आत्मविश्वास से भरना रहा।
  • आइये विस्तार से जानते है कार्यक्रम में क्या खास रहा?👇

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अद्भुत मेमोरी पावर का लाइव प्रदर्शन

👉कार्यक्रम के दौरान सुश्री ग्लैमिका पटेल ने मंच से उपस्थित दर्शकों से यादृच्छिक अंकों को बोलने के लिए कहा। दर्शकों द्वारा बताए गए अंकों को उन्होंने केवल एक बार सुनकर तुरंत याद किया और फिर उन्हें आगे तथा पीछे (फॉरवर्ड एवं बैकवर्ड), दोनों क्रम में  बिना किसी त्रुटि के दोहराकर अपनी विलक्षण स्मरण शक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। सुश्री ग्लैमिका पटेल का यह प्रदर्शन न केवल तकनीकी दृष्टि से अद्भुत था, बल्कि अत्यंत प्रेरणादायक भी रहा।

👉उनकी मेमोरी ट्रेनिंग तकनीकों ने यह सिद्ध कर दिया कि सही मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के माध्यम से मस्तिष्क की असीम संभावनाओं को जागृत किया जा सकता है। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों, प्रतिभागियों तथा तृतीय लिंग समुदाय के सदस्यों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनके प्रदर्शन की प्रशंसा की।

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“मेमोरी ट्रेनिंग सिर्फ याददाश्त नहीं, आत्मबल की शक्ति है” – ग्लैमिका पटेल

👉अपने संवाद में सुश्री ग्लैमिका पटेल ने स्पष्ट किया कि मेमोरी ट्रेनिंग का मतलब केवल अंकों या शब्दों को याद रखना नहीं है। यह प्रक्रिया व्यक्ति को मानसिक रूप से संगठित करती है, फोकस बढ़ाती है और आत्मविश्वास को मजबूत करती है।

👉उन्होंने यह भी बताया कि जब कोई व्यक्ति अपनी सोच और ध्यान को नियंत्रित करना सीख लेता है, तो वह जीवन की कई चुनौतियों का सामना अधिक संतुलन के साथ कर पाता है।

👉तृतीय लिंग समुदाय के प्रतिभागियों के लिए यह संदेश विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि यह उन्हें अपनी क्षमताओं को नए नजरिए से देखने का अवसर देता है।


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तृतीय लिंग समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं ग्लैमिका पटेल

👉गौरतलब है कि सुश्री ग्लैमिका पटेल भारत की पहली ट्रांसजेंडर मेमोरी ट्रेनर हैं, जो IMSC (Indian Memory Sports Council) से प्रमाणित हैं। वे दुर्ग और भिलाई क्षेत्र की IMSC की आधिकारिक प्रतिनिधि भी हैं।

👉पिछले कई वर्षों से वे मानसिक सशक्तिकरण, आत्मविश्वास निर्माण और व्यक्तिगत विकास के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

👉वे “Manobal Maharathi Glamika” के नाम से भी जानी जाती हैं और माइंड पावर, परफॉर्मेंस तथा सक्सेस कोच के रूप में अनेक लोगों को मार्गदर्शन दे चुकी हैं। उनका कार्यक्षेत्र केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में भी लगातार प्रयासरत हैं।


कार्यक्रम में प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया

👉कार्यशाला में शामिल तृतीय लिंग समुदाय के सदस्यों ने इस सत्र को उपयोगी और प्रेरणादायक बताया। कई प्रतिभागियों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम उन्हें यह महसूस कराते हैं कि समाज में उनकी क्षमताओं को समझा और सराहा जा रहा है।

👉अधिकारियों और आयोजकों ने भी माना कि मेमोरी ट्रेनिंग जैसे विषयों को इस तरह की कार्यशालाओं में शामिल करना एक सकारात्मक पहल है, क्योंकि इससे प्रतिभागियों को आत्मनिर्भर और मानसिक रूप से मजबूत बनने में मदद मिलती है।

समावेशी समाज की दिशा में एक सकारात्मक कदम-

👉इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य तृतीय लिंग समुदाय को मानसिक रूप से सशक्त बनाना, उनकी छिपी हुई क्षमताओं को पहचान दिलाना, उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था। सुश्री ग्लैमिका पटेल की प्रभावशाली सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष ऊँचाई प्रदान की और यह सशक्त संदेश दिया कि प्रतिभा किसी भी लिंग की मोहताज नहीं होती।


निष्कर्ष

👉दुर्ग में आयोजित यह विशेष कार्यशाला तृतीय लिंग समुदाय के लिए एक सीखने और संवाद का मंच बनी। सुश्री ग्लैमिका पटेल द्वारा प्रस्तुत मेमोरी स्किल्स का प्रदर्शन केवल तकनीकी अभ्यास नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और मानसिक सशक्तिकरण का संदेश था। इस कार्यक्रम ने यह दिखाया कि सही मार्गदर्शन और सकारात्मक वातावरण मिलने पर हर व्यक्ति अपनी क्षमताओं को बेहतर ढंग से पहचान सकता है और आगे बढ़ सकता है


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज़

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