BSP में श्रमिक शोषण पर सीधी चोट: BSP Workers Union ने गठित किया ठेका श्रमिक प्रकोष्ठ, अमित बर्मन को सौंपा नेतृत्व, धनंजय गिरी बने महासचिव

– DIGITAL BHILAI NEWS – 

  • भिलाई इस्पात संयंत्र… देश के औद्योगिक मानचित्र पर एक ऐतिहासिक नाम। लेकिन इसी संयंत्र के भीतर आज एक चुपचाप बदलती हुई हकीकत सामने आ रही है —
  • नियमित कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है और ठेका श्रमिकों की निर्भरता तेजी से बढ़ रही है।
  • इसी बदलाव के बीच ठेका श्रमिकों के शोषण, असुरक्षित रोजगार और न्यूनतम वेतन से जुड़े सवाल अब खुलकर सामने आने लगे हैं।
  • इन्हीं हालातों को देखते हुए BSP वर्कर्स यूनियन (BWU) ने एक अहम फैसला लिया है, जो आने वाले समय में संयंत्र की श्रमिक राजनीति की दिशा बदल सकता है।

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  • आइए विस्तार से जानते है👇

ठेका श्रमिकों के लिए स्वतंत्र संगठन-

👉BWU की हालिया बैठक में निर्णय लिया गया कि अब ठेका श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए एक स्वतंत्र संगठन, BWU के ठेका प्रकोष्ठ के रूप में कार्य करेगा।

BWU
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👉यह प्रकोष्ठ पूरी तरह ठेका श्रमिकों के अधिकार, सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियों के लिए समर्पित रहेगा।

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👉BWU अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता ने अवसर पर कहा कि, “जब संयंत्र की रीढ़ आज ठेका श्रमिकों पर टिकी है, तो उनके अधिकारों की रक्षा भी संगठित तरीके से होना आवश्यक है।”


अनुभव और युवा ऊर्जा का संतुलन

👉इस नए प्रकोष्ठ के नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपते हुए “अमित बर्मन” को ठेका प्रकोष्ठ का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

👉अमित बर्मन यूनियन के सबसे वरिष्ठ, अनुभवी और श्रमिक मामलों के जानकार नेताओं में गिने जाते हैं।

👉वहीं युवा नेतृत्व को आगे लाते हुए धनंजय गिरी को ठेका प्रकोष्ठ का महासचिव मनोनीत किया गया है।

👉बैठक में यह भी तय हुआ कि शीघ्र ही पूरी कार्यकारिणी गठित की जाएगी, जिससे संगठन जमीनी स्तर पर सक्रिय रूप से काम शुरू कर सके।


न्यूनतम वेतन से लेकर छंटनी तक — प्रमुख मुद्दे –

👉ठेका प्रकोष्ठ ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकताएं होंगी —

  • ठेका श्रमिकों को शासन द्वारा निर्धारित Minimum Wages से कम भुगतान न हो।
  • संयंत्र में अन्यायपूर्ण छंटनी या मनमानी हटाने की प्रक्रिया न की जाए।
  • कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और स्थायित्व सुनिश्चित किया जाए।
  • ठेका श्रमिकों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार समाप्त किया जाए।
  • यह प्रकोष्ठ इन सभी मुद्दों पर संयंत्र प्रबंधन से संवाद और आवश्यक होने पर संघर्ष — दोनों रास्तों पर कार्य करेगा।

क्यों अहम है यह फैसला? — एक बड़ा संकेत!

👉बीते कुछ वर्षों में BSP सहित देश के कई सार्वजनिक औद्योगिक प्रतिष्ठानों में Contractual Workforce की संख्या में तेज़ वृद्धि हुई है।

👉यह मॉडल लागत घटाने में तो मददगार रहा, लेकिन इसके साथ रोजगार की अस्थिरता और श्रमिक शोषण की शिकायतें भी बढ़ीं।

👉BWU द्वारा ठेका प्रकोष्ठ का गठन ठेका श्रमिकों के संगठित आवाज बनने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।


निष्कर्ष

भिलाई इस्पात संयंत्र के भीतर अब ठेका श्रमिक केवल “वर्कफोर्स” नहीं, बल्कि संगठित शक्ति बनने की ओर बढ़ रहे हैं। BWU का ठेका प्रकोष्ठ न केवल श्रमिक अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि संयंत्र में न्यायपूर्ण और संतुलित श्रम व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा। अब देखने वाली बात होगी —यह नई श्रमिक संरचना BSP के भविष्य को किस दिशा में ले जाती है।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज 

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