BSL अनुकंपा जन्मतिथि विवाद केस: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की SAIL की याचिका- हाईकोर्ट का आदेश बरकरार
– DIGITAL BHILAI NEWS – (BSL)-20 अगस्त 2025 – नई दिल्ली/रांची
- Bokaro Steel Plant (SAIL) के कर्मचारियों और उनके परिजनों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत आई है।
- सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2025 को सुनाए गए आदेश में साफ किया कि अनुकंपा नियुक्ति में उम्र तय करते समय मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र (Matriculation Certificate) ही निर्णायक होगा।
- कोर्ट ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) खारिज कर दी और झारखंड हाईकोर्ट के 18 जनवरी 2024 वाले आदेश को बरकरार रखा।
- आइए जानते है क्या है पूरा मामला 👇🏻
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पृष्ठभूमि: बोकारो स्टील में विवाद क्यों❓
👉🏻बोकारो स्टील प्लांट (BSL) में वर्षों से अनुकंपा नियुक्ति जन्मतिथि को लेकर विवाद चल रहा था।
👉🏻जब किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उनके वारिस को परिवार के भरण-पोषण के लिए नौकरी दी जाती है।
👉🏻इस नियुक्ति के लिए उम्मीदवार की अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित है।
👉 विवाद तब पैदा हुआ जब बोकारो स्टील प्रबंधन उम्मीदवार की आयु तय करने के लिए मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट को मानने से इंकार कर रहा था।
👉🏻इसके बजाय, वे मृतक कर्मचारी द्वारा भरी गई पर्सनल फाइल में लिखी आयु को आधार मान रहे थे।
👉🏻कई बार पर्सनल फाइल में लिखी आयु अनुमानित होती थी, जिससे वास्तविक उम्र से फर्क पड़ता था।
नतीजा❌
👉कई उम्मीदवारों को “35 साल से ज्यादा उम्र” बताकर नियुक्ति से वंचित कर दिया गया।
👉और जो नौकरी पर लग भी गए, उनमें से कई को गलत उम्र गिनकर समय से पहले रिटायर कर दिया गया।
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कानूनी सिद्धांत: कोर्ट ने किन फैसलों पर भरोसा किया⁉️
👉कानून में पहले से ही यह स्पष्ट है कि आयु निर्धारण का सबसे मजबूत और निर्णायक आधार मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र होता है।
👉 आइए देखते है पूर्व में इस तरह के case के क्या फैसले रहे –
Case 1 – सुप्रीम कोर्ट (Manoj Kumar vs. Govt. of NCT of Delhi, 2010)
“मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र एक मजबूत प्रमाण है। हाँ, अगर इसे बदला/संशोधित गया हो, तो अन्य रिकॉर्ड भी देखे जा सकते हैं।”
Case 2 – झारखंड हाईकोर्ट की फुल बेंच (Kamta Pandey vs. BCCL, 2007)
“शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी मैट्रिकुलेशन DOB ही निर्णायक प्रमाण है। कोई भी सर्विस रिकॉर्ड या पर्सनल फाइल मान्य नहीं होगी।”
अगर मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट उपलब्ध न हो, तभी उम्र का आकलन Medical Board से कराया जा सकता है।लेकिन यह सिर्फ अपवाद (exception) है।
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मामला कैसे बढ़ा❓
1. Tribunal (CAT, Ranchi Bench – 2018)
👉मृत कर्मचारी नवल किशोर राजक के बेटे उत्तम राजक ने अनुकंपा नियुक्ति मांगी।
- SAIL ने personal data form में दर्ज उम्र को मानकर कहा → वह 35 साल से ऊपर हैं।
- Tribunal ने SAIL का फैसला खारिज कर कहा → matric DOB ही final proof है।
- आदेश: मामला मैट्रिक DOB के आधार पर फिर से विचार करो।
2. झारखंड हाईकोर्ट (18 जनवरी 2024)
- SAIL ने CAT के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
- हाईकोर्ट ने साफ कहा: Tribunal ने सही आदेश दिया।
- Personal data form पर भरोसा करना कानून के विपरीत है। Matric DOB ही decisive है।
- नतीजा → SAIL की रिट याचिका खारिज।
3. सुप्रीम कोर्ट (18 अगस्त 2025)
- SAIL ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ SLP (Special Leave Petition) दायर की।
- सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित वरिष्ठ वकील पेश हुए।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा: “हम हाईकोर्ट के आदेश में दखल नहीं देंगे।” हाँ, कानूनी प्रश्न (question of law) भविष्य के किसी अन्य केस में खुला रहेगा।
- नतीजा → SLP खारिज।

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फैसले का असर‼️
1. परिवार को राहत:
👉Uttam Rajak का मामला अब matric DOB पर विचार होगा।
👉उनके नियुक्ति के रास्ते खुले।
2. SAIL और अन्य PSU पर असर:
👉अब अनुकंपा नियुक्ति और सेवा आयु तय करते समय मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र ही प्राथमिक आधार होगा।
👉Personal data form या service record को अब decisive नहीं माना जाएगा।
3. भविष्य के केस:
👉सुप्रीम कोर्ट ने “question of law open” रखा है।
👉यानी भविष्य में अगर कोई और जटिल मामला आता है, तो कोर्ट विस्तृत व्याख्या कर सकता है।
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सशक्त संदेश⚖️
इस केस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि अदालतों में जीत-हार का फैसला केवल बड़े वकीलों की मौजूदगी पर निर्भर नहीं करता। अगर किसी पक्ष के पास सही दस्तावेज़, ठोस कानूनी आधार और मज़बूत पैरवी हो, तो फिर सामने चाहे सरकार ही क्यों न हो और उसके पक्ष में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता जैसे वरिष्ठ वकील क्यों न खड़े हों, वे भी हार से नहीं बचा सकते।
निष्कर्ष
यह फैसला बोकारो स्टील (BSL) जैसे संस्थानों में काम कर रहे हजारों परिवारों के लिए मील का पत्थर (landmark relief) है। अब कर्मचारियों के वारिसों को अनुकंपा नियुक्ति में गलत उम्र का बहाना बनाकर नौकरी या सेवा से वंचित नहीं किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि “मैट्रिकुलेशन DOB ही अंतिम और निर्णायक है।”
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✍🏻रिपोर्ट : DIGITAL BHILAI NEWS
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K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।

