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4 ओलंपियन देने वाला शहर भिलाई”… पर अब खुद का ‘जयंती स्टेडियम’ बदहाली की गिरफ्त में!

– DIGITAL BHILAI NEWS – (Bhilai Jayanti Stadium News)

  • एक ओर शहर भर में “4 ओलंपियन देने वाला शहर भिलाई” के बैनर गर्व से लहरा रहे हैं —
  • वहीं दूसरी ओर, उन्हीं खिलाड़ियों का अभ्यास स्थल ‘Jayanti Stadium’ आज जर्जरता और उपेक्षा का प्रतीक बन गया है।
  • जिस मैदान में BHILAI के बच्चों ने सुबह-शाम पसीना बहाकर देश के लिए खिलाड़ी, सैनिक और पुलिस अधिकारी बनने का सपना पूरा किया —वह आज झाड़ियों और ताले के पीछे कैद है।
  • विस्तार से जानिए क्या है पूरा मामला?👇

भिलाई — खेलों की धरती, पर आज मैदान सूने

BHILAI का नाम देशभर में न सिर्फ इस्पात उत्पादन के लिए, बल्कि खेल प्रतिभाओं की जननी के रूप में भी जाना जाता है।
यही शहर है जिसने देश को दिए हैं:

BHILAI OLYAMPION NAMES

  • 🥇 4 ओलंपियन,

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  • 🏆 2 अर्जुन अवार्डी,

  • 🎖️ 25 विक्रम अवार्डी,

  • 1 गुंडाधुर अवार्ड विजेता खिलाड़ी।

  • 1 शहीद राजीव पांडेय अवार्डी 

पर आज विडंबना यह है कि उन्हीं खिलाड़ियों की विरासत — Jayanti Stadium, जहां पीढ़ियों ने पसीना बहाया, ताले और झाड़ियों के बीच दम तोड़ रही है।


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जयंती स्टेडियम: कभी खेल संस्कारों का केंद्र, अब वीरान

👉स्टेडियम की सीढ़ियों पर अब काई और झाड़ियाँ उग आई हैं। गेटों पर बेलें लिपटी हैं और रास्ते पूरी तरह से बंद हैं।

Bhilai Sports Ground

👉जो मैदान कभी सुबह बच्चों की आवाज़ों से गूंजता था, वह अब सन्नाटे और गाजर-घास से भरा पड़ा है।

👉सूत्रों के अनुसार, स्टेडियम साल में केवल दो बार — 15 अगस्त और 26 जनवरी के मौकों पर खोला जाता है, जब यहां परेड का आयोजन होता है।

👉उसके बाद रंग-रोगन के साथ गेट फिर से बंद कर दिए जाते हैं।


सड़कों पर दौड़ने 🚷 को मजबूर युवा खिलाड़ी

👉Jayanti Stadium के बंद रहने के कारण अब भिलाई के खिलाड़ी और फिटनेस प्रेमी सुबह-शाम भिलाई क्लब के पास की सड़कों और आसपास के खुले मैदानों में दौड़ने व प्रैक्टिस करने को मजबूर हैं।

👉लेकिन यही क्षेत्र अब कार सीखने वालों के लिए भी ट्रेनिंग ज़ोन बन गया है।

👉नतीजा यह है कि दौड़ते खिलाड़ियों और कार सीख रहे नौसिखियों के बीच दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है।

👉स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई बार हल्की झड़पें और बहसें भी हो चुकी हैं, क्योंकि प्रैक्टिस कर रहे युवाओं और कार सीखने वालों के रास्ते आपस में टकरा जाते हैं।

👉यह स्थिति न तो खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित है और न ही आम नागरिकों के लिए।

👉यदि जयंती स्टेडियम को जल्द मरम्मत कर खोल दिया जाए, तो खिलाड़ी फिर से सुरक्षित और अनुशासित माहौल में अभ्यास कर सकेंगे —और सड़कों पर होने वाले इन अनचाहे हादसों और टकरावों से भी बचा जा सकेगा।


BSP वर्कर्स यूनियन ने उठाई आवाज़

👉इस समस्या को लेकर BSP कर्मियों (विमल कांत पांडे, और स्थानीय युवाओं ने BSP वर्कर्स यूनियन अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता के समक्ष अपनी बात रखी।

👉उज्ज्वल दत्ता ने कहा कि,  “यह बेहद गंभीर विषय है। भिलाई खेलों के लिए भी जाना जाता है, हम इस मुद्दे को प्रबंधन तक पहुंचाएंगे और जल्द समाधान की दिशा में प्रयास होगा।”


क्या कहता है यह विरोधाभास?

  • एक ओर, “Atulniya Bhilai” (अतुलनीय भिलाई) का प्रचार शहर के हर कोने में है।

  • पर दूसरी ओर, जिस जगह से यह गौरव शुरू हुआ — वह खुद असमान्य उपेक्षा की शिकार है।

अगर यही हाल रहा तो आने वाली पीढ़ियों के लिए भिलाई की खेल परंपरा सिर्फ पोस्टरों में सिमटकर रह जाएगी।

एक तरफ ‘सांसद खेल महोत्सव’, दूसरी तरफ स्टेडियम की ये हालत

👉जहां एक ओर सांसद खेल महोत्सव जैसी पहलें शुरू कर खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने और खेलों को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खिलाड़ियों के अभ्यास स्थल Jayanti Stadium की यह बदहाली गहरी चिंता का विषय बन गई है।

👉सरकार और प्रबंधन जब खेल संस्कृति को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं, तब यह सवाल उठना लाज़मी है कि बिना मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षित अभ्यास स्थल के, भिलाई के खिलाड़ी कैसे आगे बढ़ेंगे?

👉खेल महोत्सव की भावना तभी सार्थक होगी, जब मैदानों और मुलभुत सुविधाओं की भी सुध ली जाएगी — जहां से असली प्रतिभाएँ निखरती हैं।


निष्कर्ष: अब वक्त है ‘जयंती स्टेडियम’ को पुनर्जीवित करने का

भिलाई ने देश को सिर्फ स्टील नहीं, बल्कि खेलों के सितारे भी दिए हैं। प्रशासन और SAIL-BSP प्रबंधन को जल्द ही जयंती स्टेडियम की मरम्मत, साफ-सफाई और पुनः खिलाड़ियों के लिए खोलने की दिशा में कदम उठाना चाहिए — ताकि “4 ओलंपियन देने वाला शहर भिलाई” सिर्फ एक पोस्टर नहीं, बल्कि एक जीवंत खेल परंपरा बना रहे।

BHILAI JAYANTI STADIUM


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज़ 

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