भिलाई गणेश उत्सव में मजबूरी की व्यवस्था: बिना पास खरीदे नहीं मिल रहे बप्पा के दर्शन
– DIGITAL BHILAI NEWS –
04 – सितंबर – 2025 – भिलाई वासियों की आवाज
- गणेश चतुर्थी उत्सव का रंगारंग माहौल पूरे BHILAI शहर में छाया हुआ है।
- जगह-जगह विशाल गणेश पंडाल सजाए गए हैं और श्रद्धालु भारी संख्या में बप्पा के दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं।
- लेकिन इस भक्ति और आस्था के बीच एक बड़ा विवाद सामने आया है—BHILAI के कुछ प्रमुख गणेश पंडालों में भगवान गणेश के दर्शन के नाम पर भी लोगो को विवश कर पैसे वसूले जा रहे हैं।
- यदि आपके पास पैसा है टिकिट खरीदने का तो ठीक, वरना आप भगवान के दर्शन पा ही नहीं सकते…
👉इस व्यवस्था के खिलाफ आम नागरिकों ने एकजुट होकर कलेक्टर दुर्ग को ज्ञापन सौंपा और स्पष्ट मांग रखी कि 👇🏻
“दर्शन की व्यवस्था नि:शुल्क (Free) होनी चाहिए, टिकट सिर्फ झांकी या सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए लिया जाए।”
👉आइए जानते है BHILAI के कौन से पंडाल में इस तरह की वसूली श्रद्धालुओं से की जा रही है ?
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VIP/VVIP टिकट व्यवस्था से श्रद्धालु आहत ❗
👉नागरिकों का कहना है कि कुछ पंडाल समितियों के VIP/VVIP कल्चर स्थापित करने से यह संदेश समाज में जा रहा है कि आप बिना पैसे दिए भगवान के दर्शन कर ही नहीं सकते।
❗व्यवस्था ही इस प्रकार बनाई गई है कि आप झांकी देखने के बाद ही अंत में बप्पा के दर्शन कर पाएंगे, जिससे आपको पैसे देकर टिकट लेने पर विवश किया जा रहा है।।
❗यदि आपके पास पैसा है टिकिट खरीदने का तो ठीक, वरना आप भगवान के दर्शन पा ही नहीं सकते…
❗यह मजबूर करने वाली व्यवस्था भिलाई के “सेक्टर-2 और नया खुर्सीपार (जुरासिक वर्ड पंडाल)” में प्रमुख रूप से देखी जा रही है।
👉इसका सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवार और सामान्य श्रद्धालुओं पर पड़ रहा है, जो बेचारे दर्शन करने तो आ रहे है परन्तु इस व्यवस्था के कारण उन्हें भगवान के दर्शन भी नसीब नहीं हो पा रहे, और मजबूरन उन्हें वापिस लौटना पड़ रहा है।

👉ज्ञापन देने वाले नागरिकों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों में इस तरह का भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है।

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BHILAI के नागरिकों की मांगें:👉
ज्ञापन में नागरिकों ने जिला प्रशासन के सामने 3 प्रमुख मांगें रखी हैं:
✔️1. फ्री दर्शन लाइन अनिवार्य हो – हर गणेश पंडाल में नि:शुल्क लाइन से हर वर्ग का नागरिक भगवान गणेश के दर्शन कर सके। (इस तरह की व्यवस्था वर्तमान में BHILAI के सभी प्रमुख पंडालों में से सेक्टर 1 और सेक्टर 4 के गणेश पंडालों में सक्रिय है, जो कि सराहनीय पहल है।)
✔️2. VIP/VVIP टिकट पर रोक लगे – आस्था और पैसे को जोड़ने वाली यह संस्कृति तुरंत समाप्त की जाए।
✔️3. प्रशासन निगरानी करे – ताकि जबरन टिकट वसूली और भेदभाव जैसी घटनाएं रोकी जा सकें।
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टिकट की तस्वीरें भी सौंपी⚠️
❗नागरिकों ने कलेक्टर को सबूत के तौर पर टिकटों की फोटो भी सौंपी।
❗नागरिकों ने भिलाई के दो प्रमुख पंडाल – सेक्टर-2 और नया खुर्सीपार (जुरासिक वर्ड पंडाल) में इस VIP टिकट व्यवस्था की मुख्य रूप से शिकायत की है।
❗इन टिकटों पर साफ लिखा है कि 3 साल से ऊपर बच्चों पर भी पूरा शुल्क लगेगा और टिकट नॉन-रिफंडेबल होगा।

⚠️इससे साबित होता है कि दर्शन और झांकी दोनों को जोड़कर शुल्क वसूला जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि “यदि झांकी या सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने के लिए शुल्क लिया जाए तो कोई समस्या नहीं, लेकिन भगवान के दर्शन सभी के लिए नि:शुल्क होने चाहिए।”💯✔️
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भिलाई की परंपरा और आस्था पर असर❗
✔️भिलाई का गणेश उत्सव हमेशा से जनता का उत्सव माना गया है। यहां के प्रमुख पंडाल में हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
❌आम नागरिकों का कहना है कि गणेश उत्सव का असली मकसद भक्ति और सामाजिक एकता है, न कि VIP कल्चर को बढ़ावा देना।
❗यदि यह प्रथा जारी रही तो समाज में असमानता और आस्था में दरार आ सकती है।
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प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की अपील🙏🏻
❗ज्ञापन देने वाले नागरिकों ने कलेक्टर से जल्द से जल्द इस मामले में कार्रवाई की अपील की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन तत्काल कदम नहीं उठाता तो आने वाले दिनों में यह विवाद और बड़ा हो सकता है।
❗कलेक्टर से यह भी मांग की गई है कि वे सभी समितियों को आदेश जारी करें कि –
- भगवान के डायरेक्ट दर्शन की व्यवस्था अलग से हो जो कि हमेशा नि:शुल्क हो।
- झांकी, सांस्कृतिक या मनोरंजन कार्यक्रमों के लिए अलग टिकट की व्यवस्था की जा सकती है।
- VIP और VVIP पास पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
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जनता की भावनाएं❗
ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले एक नागरिक श्री सुशील कुमार केसरी ने कहा,
“हम सभी चाहते हैं कि गणेश उत्सव बिना किसी भेदभाव के मनाया जाए। यदि पैसा ही मापदंड बन गया तो गरीब भक्त बप्पा के दर्शन से वंचित हो जाएंगे। गणेशजी तो सबके हैं, फिर इस तरह की विवश कर देने वाली व्यवस्था क्यों?”
धर्म को व्यापार बनाना बंद कीजिए…
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आगे की राह
अब नागरिक जिला प्रशासन की ओर देख रहा है कि वह इस संवेदनशील मामले पर क्या रुख अपनाता है। यदि प्रशासन ठोस कदम उठाता है तो यह भिलाई ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में एक सकारात्मक संदेश देगा कि धार्मिक आस्था किसी टिकट या पास की मोहताज नहीं है।
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✍🏻रिपोर्ट : DIGITAL BHILAI NEWS

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।

