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एक बुजुर्ग महिला की माला के लिए रुक गई बग्घी… डॉ. उदय ने जो किया, उसने जीत लिया सबका दिल! पढ़े 👉

– DIGITAL BHILAI NEWS –

  • एक तरफ ढोल की थाप, फूलों की बारिश और बग्घी पर सवार होकर विदाई का भव्य नजारा, तो दूसरी तरफ आंखों में आंसू और अपनों से बिछड़ने का दर्द।
  • भिलाई इस्पात संयंत्र के पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र (JLNHRC), सेक्टर-9 में 31 अक्टूबर 2026 को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने डॉक्टर और मरीज के रिश्ते को एक बार फिर मानवीय संवेदनाओं के सबसे खूबसूरत रूप में सामने ला दिया।
  • डॉ. उदय कुमार ने इसी अस्पताल में जन्म लिया था और इसी अस्पताल में अपनी चिकित्सकीय सेवाओं का लंबा सफर पूरा कर CMO एवं Head of Medical Services (HOM) के पद से सेवानिवृत्त हुए।
  • उनकी विदाई केवल एक अधिकारी की विदाई नहीं, बल्कि अस्पताल से जुड़े हजारों लोगों के लिए एक भावुक पल बन गई।
  • आइए विस्तार से जानते हैं 👇

जिस अस्पताल में जन्म लिया, वहीं से शुरू और समाप्त हुआ सेवा का एक यादगार अध्याय

👉कुछ रिश्ते केवल नौकरी या पेशे तक सीमित नहीं होते, बल्कि जीवन का हिस्सा बन जाते हैं। डॉ. उदय कुमार और सेक्टर-9 अस्पताल का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही रहा। 30 अक्टूबर 1966 को इसी अस्पताल में जन्म लेने वाले डॉ. उदय ने जीवन में आगे चलकर चिकित्सा के क्षेत्र को अपना कर्मक्षेत्र बनाया और उसी संस्थान में चिकित्सक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। समय का एक अद्भुत संयोग देखिए कि जिस अस्पताल में उन्होंने जन्म लिया, उसी अस्पताल से 31 अक्टूबर 2026 को उन्होंने अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को अलविदा कहा। करीब छह दशक तक इस संस्थान से उनका जुड़ाव किसी सामान्य कार्यकाल से कहीं अधिक भावनात्मक महत्व रखता है। शनिवार को जब वे अपने कार्यालय से अंतिम बार बाहर निकले, तो उनके चेहरे पर मुस्कान के साथ आंखों में आंसू भी थे। यह उस व्यक्ति का भावुक क्षण था, जिसने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इसी अस्पताल और यहां के लोगों के साथ बिताया।


एप्रन उतारकर कुर्सी पर रखा, फिर शुरू हुई यादगार विदाई

👉31 अक्टूबर को दोपहर करीब डेढ़ बजे का समय था। डॉ. उदय कुमार ने अपना एप्रन उतारकर कुर्सी पर रख दिया। यह दृश्य उनके चिकित्सकीय दायित्वों के औपचारिक समापन का प्रतीक बन गया। इस अवसर पर पूर्व CEO विनोद कुमार अरोड़ा, पूर्व ED (Projects) एके भट्टा, भावी Head of Medical Services डॉ. संबिता पांडा, GM सेक्टर-9 संजय कुमार, डॉ. गुंजन कुमार, डॉ. अनिरुद्ध मेने, डॉ. शेख रियासत इलाही सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक और अधिकारी मौजूद रहे। दर्जनों डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के साथ जब डॉ. उदय अपने कार्यालय से बाहर निकले तो वहां का माहौल पूरी तरह बदल चुका था। अस्पताल के दरवाजे से ही पुष्प वर्षा शुरू हो गई, जो अस्पताल के मुख्य द्वार तक जारी रही।

रेड कारपेट पर डॉ. उदय अपनी पत्नी प्रेरणा धाबर्डे के साथ आगे बढ़ रहे थे। दोनों ओर कतारबद्ध मेडिकल स्टाफ, सहयोगी और शुभचिंतक फूल लेकर खड़े थे। कोई हाथ मिलाकर शुभकामनाएं दे रहा था, तो कोई गले लगकर अपने भाव व्यक्त कर रहा था। ढोल की थाप और पुष्प वर्षा के बीच यह विदाई समारोह एक यादगार आयोजन में बदल गया। अस्पताल के कर्मचारियों के साथ मरीजों और उनके परिजनों ने भी उनसे मुलाकात कर नई पारी के लिए शुभकामनाएं दीं। कई मेडिकल स्टाफ की आंखें भी नम थीं।

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एक बुजुर्ग महिला की माला और झुका हुआ सिर… विदाई का सबसे मार्मिक दृश्य

👉इस विदाई समारोह का एक ऐसा प्रसंग सामने आया, जिसने डॉ. उदय कुमार के व्यक्तित्व को समझने के लिए किसी परिचय या उपलब्धियों की सूची से कहीं अधिक प्रभावशाली तस्वीर पेश की। छत्तीसगढ़ से प्रथम बोर्ड मेंबर एवं सदस्य, ललित कला अकादमी, नई दिल्ली (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) डॉ. अंकुश देवांगन ने इस घटना को अपनी एक बेहद भावुक लघुकथा ‘कृतज्ञता’ के माध्यम से व्यक्त किया है।

उनके शब्दों में, विदाई समारोह के दौरान एक गरीब बुजुर्ग महिला कांपते हाथों में फूलों की माला लिए डॉ. उदय के पास पहुंचने का प्रयास कर रही थी। महिला के मन में संकोच भी था। सामने भिलाई इस्पात संयंत्र के बड़े चिकित्सक थे, जिनके ऊपर सैकड़ों लोग पुष्प वर्षा कर रहे थे। उसे आशंका थी कि इतने लोगों की भीड़ में क्या डॉ. उदय उसकी ओर ध्यान देंगे?


लेकिन डॉ. उदय की नजर उस महिला पर पड़ गई।

👉उन्होंने तत्काल बग्घी रुकवाई और भीड़ को इशारा किया कि महिला को उनके पास आने दिया जाए। बुजुर्ग महिला के हाथ इतने कांप रहे थे कि वे पूरी तरह ऊपर तक नहीं उठ पा रहे थे। तब बग्घी पर बैठे डॉ. उदय ने स्वयं अपना सिर झुका दिया। इसके बावजूद जब महिला के हाथ उनके सिर तक नहीं पहुंच पाए, तो उन्होंने बड़े सम्मान के साथ महिला के हाथों को थामकर माला पहनाने में मदद की। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद भावुक कर देने वाला था। डॉ. अंकुश देवांगन ने अपनी लघुकथा में लिखा कि उस समय ऐसा लग रहा था मानो समय ठहर गया हो। दोनों तरफ ही नहीं, बल्कि भीड़ में मौजूद लोगों की आंखों में भी आंसू थे।

👉उन्होंने डॉ. उदय के व्यक्तित्व को इन शब्दों में अभिव्यक्त किया कि वे लोगों के दिलों पर राज करते हैं और शायद उन्हें स्वयं भी पता नहीं कि उन्होंने अपने जीवन में कितने लोगों के लिए क्या-क्या किया है। यह प्रसंग बताता है कि किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान केवल उसके पद, अधिकार या उपलब्धियों से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि समाज के सामान्य लोग उसे किस सम्मान और अपनत्व से देखते हैं।


बग्घी पर सवार होकर तालपुरी स्थित आवास तक पहुंचे डॉ. उदय

👉अस्पताल परिसर में आयोजित विदाई समारोह के बाद डॉ. उदय कुमार और उनकी पत्नी प्रेरणा धाबर्डे के लिए विशेष बग्घी की व्यवस्था की गई थी। ओपीडी गेट से बाहर निकलते ही सामने सजी हुई बग्घी उनका इंतजार कर रही थी। इसके बाद वे अपनी पत्नी के साथ बग्घी पर सवार हुए और तालपुरी स्थित अपने आवास तक पहुंचे। ढोल की थाप, फूलों की वर्षा और शुभकामनाओं के बीच यह विदाई यात्रा भिलाई के लिए एक यादगार दृश्य बन गई। यह किसी अधिकारी के सामान्य सेवानिवृत्ति समारोह से अलग थी। इसमें एक चिकित्सक के प्रति लोगों का स्नेह, सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव साफ दिखाई दे रहा था।


स्किन एंड बर्न वार्ड से CMO एवं HOM तक का सफर

👉डॉ. उदय कुमार का सेक्टर-9 अस्पताल से जुड़ाव केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहा। वे स्किन एंड बर्न वार्ड के HOD के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। चिकित्सा सेवाओं के साथ अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयासों में उनकी सक्रिय भूमिका रही। उनके कार्यकाल के अंतिम तीन महीने CMO एवं Head of Medical Services के रूप में रहे। भले ही बतौर HOM उनका कार्यकाल महज तीन महीने का रहा, लेकिन इस अवधि में अस्पताल की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए किए गए प्रयासों की चर्चा विदाई समारोह के दौरान भी होती रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने अस्पताल में बाहर से चिकित्सकों को लाने के प्रयास किए और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। अस्पताल को नए स्वरूप में विकसित करने और मरीजों की सुविधाओं को प्राथमिकता देने के उनके प्रयासों को मेडिकल स्टाफ और सहयोगियों ने भी याद किया।


विदाई में शामिल हुए विभिन्न सामाजिक संगठन और शुभचिंतक

👉डॉ. उदय कुमार को शुभकामनाएं देने के लिए केवल अस्पताल का मेडिकल स्टाफ ही नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी पहुंचे। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि डॉ. उदय का जुड़ाव अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं था। अलग-अलग वर्गों और संगठनों के लोगों का उनके प्रति सम्मान इस विदाई समारोह में दिखाई दिया।


एक पद से सेवानिवृत्ति, लेकिन रिश्तों और यादों का सफर जारी रहेगा

👉सेवानिवृत्ति किसी भी कर्मचारी के पेशेवर जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती है। लेकिन कुछ लोगों के लिए यह केवल सेवा से मुक्त होने का अवसर नहीं, बल्कि उन रिश्तों और यादों को देखने का समय भी होता है, जिन्हें उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बनाया होता है। डॉ. उदय कुमार की विदाई में यही भाव सबसे अधिक दिखाई दिया। एक ओर अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी और चिकित्सक मौजूद थे, तो दूसरी ओर मेडिकल स्टाफ, सफाई कर्मचारी, मरीजों के परिजन और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उन्हें शुभकामनाएं देने पहुंचे थे। एक बुजुर्ग महिला का माला पहनाने के लिए आगे बढ़ना और डॉ. उदय का सम्मानपूर्वक उसके सामने सिर झुका देना इस पूरे आयोजन की सबसे यादगार तस्वीरों में से एक बन गया। जिस अस्पताल में उन्होंने जन्म लिया, उसी अस्पताल में चिकित्सक बनकर लोगों की सेवा की और अंततः उसी स्थान से अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर विदाई ली।

डॉ. उदय कुमार अब भले ही सेक्टर-9 अस्पताल में अपने नियमित दायित्वों का निर्वहन नहीं करेंगे, लेकिन वहां बिताए गए वर्षों की यादें, मरीजों और सहयोगियों के साथ बने रिश्ते और उनकी विदाई के ये भावुक पल लंबे समय तक भिलाई के चिकित्सा जगत में याद किए जाते रहेंगे।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज

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