Retention स्कीम से लेकर दुकानों की लीज तक: BSP टाउनशिप के 6 मुद्दों पर इस्पात मंत्री से सीधी बातचीत, सांसद विजय बघेल और पूर्व केबिनेट मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने दिल्ली में रखी भिलाई की जनता की आवाज़
– DIGITAL BHILAI NEWS –
- भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) की टाउनशिप से जुड़े हजारों कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों और व्यापारियों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को लेकर आज एक अहम राजनीतिक पहल देखने को मिली।
- दुर्ग सांसद विजय बघेल एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने केंद्रीय इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी से मुलाकात कर एक विस्तृत और तथ्यात्मक मांग-पत्र सौंपा।
- इस मांग-पत्र के माध्यम से भिलाई स्टील प्लांट टाउनशिप में हाल के वर्षों में लागू की गई नीतियों से उत्पन्न छह प्रमुख समस्याओं को सामने रखा गया।
- यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं रही, बल्कि टाउनशिप में रह रहे आम लोगों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव, सामाजिक असंतोष और प्रशासनिक असंतुलन को ठोस उदाहरणों और आंकड़ों के साथ रखा गया।
- सांसद और पूर्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि इन मुद्दों का समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो इसका असर सीधे उत्पादन-परिवेश, कर्मचारी संतोष और सार्वजनिक उपक्रम की छवि पर पड़ेगा।
- आइये विस्तार से जानते है इस बैठक के बारे में 👇

1. रिटेंशन स्कीम में अचानक किराया वृद्धि बना सबसे बड़ा मुद्दा
👉मांग-पत्र में पहला और सबसे गंभीर मुद्दा बीएसपी रिटेंशन स्कीम से जुड़ा है। यह स्कीम वर्ष 2007 से लगातार लागू है, जिसके तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सीमित अवधि के लिए उसी क्वार्टर में रहने की सुविधा दी जाती रही है। पहले इस योजना में किराया व्यवस्था क्रमिक और पूर्व निर्धारित थी। समय सीमा पार करने पर अधिकतम 32 गुना तक किराया लिया जाता था, जिसे कर्मचारी किसी तरह वहन कर लेते थे।
👉लेकिन नवंबर 2025 से लागू नई व्यवस्था में इसे अचानक बदलकर ₹24 प्रति वर्गफुट कर दिया गया। यदि 650–700 वर्गफुट के एक सामान्य क्वार्टर को आधार बनाया जाए, तो मासिक किराया सीधे ₹15,000 से ₹17,000 तक पहुंच जाता है। यह वृद्धि न तो चरणबद्ध है और न ही सेवानिवृत्त कर्मियों की सीमित पेंशन आय के अनुरूप।
👉इसके साथ ही यह भी बताया गया कि रिटेंशन स्कीम के अंतर्गत कर्मचारियों से 8 से 10 लाख रुपये तक की डिपॉजिट राशि ली जाती है, जिस पर कोई ब्याज नहीं मिलता। ऐसे में एक तरफ बड़ी डिपॉजिट राशि और दूसरी तरफ अचानक बढ़ा हुआ किराया, सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर दोहरी आर्थिक मार बनकर सामने आया है।
2. थर्ड पार्टी आवासों में 60 प्रतिशत एकमुश्त रेंट वृद्धि!
👉दूसरा बड़ा मुद्दा बीएसपी टाउनशिप के थर्ड पार्टी आवासों से जुड़ा है, जहां शिक्षक, पुलिसकर्मी, बैंक और अन्य विभागों के कर्मचारी रहते हैं। पहले इन आवासों का किराया ₹5 प्रति वर्गफुट था, जिसे अचानक बढ़ाकर ₹8 प्रति वर्गफुट कर दिया गया।
👉इस फैसले का असर यह हुआ कि छोटे क्वार्टरों में रहने वाले कर्मचारियों पर ₹1500–2000 रुपये प्रति माह का अतिरिक्त बोझ आ गया, जबकि बड़े मकानों में यह बोझ ₹12,000–15,000 रुपये प्रति माह तक पहुंच गया। सांसद और पूर्व मंत्री ने इसे अचानक और असंतुलित निर्णय बताते हुए पुनर्विचार की मांग रखी।
3. दुकानों के लीज नवीनीकरण और प्रीमियम में बेतहाशा वृद्धि!
👉भिलाई टाउनशिप के बाजार कर्मचारियों और उनके परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए गए थे। वर्ष 1991 में दुकानों को लीज पर देते समय यह स्पष्ट था कि प्रीमियम स्थिर रहेगा और केवल लीज रेंट में सीमित वार्षिक वृद्धि होगी।
👉लेकिन 30 वर्षों के बाद नवीनीकरण से पहले ही प्रीमियम में अत्यधिक वृद्धि कर दी गई, जिससे छोटे व्यापारियों से लेकर शैक्षणिक और सार्वजनिक संस्थानों तक पर भारी आर्थिक दबाव पड़ गया। आज भी हजारों दुकानों का लीज नवीनीकरण इसी कारण लंबित है।
4. बीएसपी की अनुपयोगी भूमि का जनहित में उपयोग!
👉मांग-पत्र में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि बीएसपी के पास बड़ी मात्रा में अनुपयोगी और खाली भूमि है। कई पुराने रिहायशी इलाकों को तोड़कर खाली छोड़ दिया गया है, जहां न कोई निर्माण हो रहा है और न ही कोई विकास कार्य।
ऐसी भूमि को नगर निगम या राज्य सरकार को सौंपकर आवास, सामाजिक अधोसंरचना और जनकल्याणकारी परियोजनाओं में उपयोग किए जाने की मांग रखी गई।
5. सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 650 वर्गफुट क्वार्टर लाइसेंस पर देने की मांग
👉वर्तमान में बीएसपी में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अधिकतम 450 वर्गफुट के क्वार्टर ही लाइसेंस पर मिलते हैं, जबकि राउरकेला और दुर्गापुर जैसे अन्य स्टील प्लांटों में 650 वर्गफुट तक की सुविधा उपलब्ध है। इस असमानता को दूर करने की मांग भी इस ज्ञापन में शामिल रही।
6. छोटे क्वार्टरों की पुरानी लाइसेंस स्कीम को पुनः लागू करने की मांग
👉अंतिम मुद्दा छोटे क्वार्टरों, जैसे ट्यूबलर शेड और 24-यूनिट क्वार्टरों से जुड़ा है, जिन्हें पहले मात्र ₹5000 लाइसेंस फीस पर दिया गया था। वर्षों से इनके नवीनीकरण की प्रक्रिया अटकी हुई है। इसे फिर से लागू करने की मांग भी केंद्रीय मंत्री के सामने रखी गई।
मुलाकात से जगी उम्मीद
👉मुलाकात के दौरान इस्पात मंत्री को सभी मुद्दे विस्तार से समझाए गए। सांसद विजय बघेल और पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने यह स्पष्ट किया कि यह मांग-पत्र किसी विशेष वर्ग के लिए नहीं, बल्कि भिलाई टाउनशिप की स्थिरता और संतुलन के लिए है।
👉मंत्री द्वारा विषय को गंभीरता से सुने जाने के बाद अब स्थानीय स्तर पर यह उम्मीद मजबूत हुई है कि बीएसपी टाउनशिप की नीतियों पर पुनर्विचार होगा और आम लोगों को राहत मिलेगी।
👉पढ़े इस लेटर की कॉपी में विस्तृत मुद्दे 👉





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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज़

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।

