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हाईकोर्ट का सख्त फैसला: BSP टाउनशिप दुकानदारों की अपील खारिज, अब SAIL की लीज़ पॉलिसी ही अंतिम

– DIGITAL BHILAI NEWS –

क्या अब पूरी तरह बंद हो गए दुकानदारों के कानूनी रास्ते?”

  • भिलाई स्टील प्लांट (BSP) टाउनशिप के दुकानदारों के लिए एक बड़ा और निर्णायक झटका सामने आया है।
  • माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर की डिवीजन बेंच ने WA No. 35 of 2026 को खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि लीज़ नवीनीकरण (Lease Renewal) पर दुकानदारों का कोई automatic या vested legal right नहीं बनता।
  • यह फैसला न केवल मौजूदा विवाद को खत्म करता है, बल्कि भविष्य के सभी लीज़ मामलों के लिए भी स्पष्ट कानूनी दिशा तय करता है।
  • आइए विस्तार से जानते है इस खबर को👇

बैकग्राउंड | मामला कहां से शुरू हुआ?

👉BSP टाउनशिप की दुकानों को लगभग 33 वर्षों के लिए लीज़ पर दिया गया था। समय पूरा होने के बाद 33 दुकानदारों ने पहले WPC No. 2606/2025 के तहत याचिका दायर की थी, जिसे 31.10.2025 को माननीय एकल न्यायाधीश ने खारिज कर दिया।

👉इसके बाद दुकानदारों ने उस आदेश को चुनौती देते हुए रिट अपील (WA-35/2026) दायर की। अब 02.02.2026 को डिवीजन बेंच ने भी अपील को merit-less बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है।


कोर्ट का स्पष्ट संदेश | SAIL की नीति वैध और समान रूप से लागू!

👉डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि Steel Authority of India Limited (SAIL) द्वारा की गई विवादित मांगें:

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  • बोर्ड-Approved Lease Renewal Policy पर आधारित हैं, सभी समान परिस्थितियों वाले लीज़धारकों पर एक समान लागू होती हैं,
  • और प्रमाणित प्रोफेशनल वैल्यूएशन के आधार पर तय की गई हैं।
  • कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुरानी ऐतिहासिक दरें या पिछली रियायतें किसी सार्वजनिक प्राधिकरण को वर्तमान बाजार परिस्थितियों के अनुसार अपनी नीति बदलने से नहीं रोक सकतीं।

मुख्य कानूनी बिंदु | दुकानदारों की दलीलें क्यों नहीं चलीं?

डिवीजन बेंच ने एक-एक कर सभी महत्वपूर्ण कानूनी बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट की:

1. Automatic Renewal का कोई अधिकार नहीं!

  • 33 साल की लीज़ अवधि समाप्त होने के बाद: किरायेदारों को automatic renewal का कोई अधिकार नहीं मिलता। नवीनीकरण पूरी तरह lessor यानी SAIL की मर्ज़ी और नई शर्तों पर निर्भर करता है।

2. पुराने रेट दिखाकर नई नीति नहीं रोकी जा सकती!

  • SAIL: बोर्ड-Approved पॉलिसी, नए valuation, प्रीमियम, ग्राउंड रेंट और सर्विस चार्ज तय करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। पुराने कम रेट्स को आधार बनाकर इसे चुनौती नहीं दी जा सकती।

3. Holding Over (TPA Section 116) लागू नहीं!

  • कोर्ट ने कहा कि: लीज़ खत्म होने के बाद सिर्फ़ किराया या occupation charge लेते रहना, या conditional offer letter देना, Transfer of Property Act की Section 116 के तहत holding over tenancy नहीं बनाता।

4. Public Premises का दर्जा

  • BSP टाउनशिप की दुकानें: Public Premises मानी गईं, इसलिए renewal, eviction और recovery जैसे मामलों में Public Premises Act की प्रक्रिया लागू होगी।
  • कोर्ट केवल तभी दखल देगा जब साफ तौर पर arbitrariness या mala fide साबित हो, जो यहां नहीं हो सका।

अब आगे क्या? | बकाया न चुकाने वालों पर कार्रवाई संभव!

  • फैसले के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है। अब: जिन दुकानदारों ने लीज़ रेंट / राजस्व जमा नहीं किया है, उनके खिलाफ भिलाई इस्पात संयंत्र Estate Court के माध्यम से: कुर्की (Attachment), बेदखली, और रिकवरी की कार्रवाई कर सकता है।
  • कानूनी तौर पर अब दुकानदारों के पास SAIL की मांग के खिलाफ कोई प्रभावी मामला शेष नहीं बचा है।

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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज 

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