नेहरू अवॉर्ड 2025 पर सस्पेंस: दिसंबर 2024 में आख़िरी बार बंटा था सम्मान, अब प्रबंधन की चुप्पी से कर्मचारियों में असमंजस

– DIGITAL BHILAI NEWS – 

  • भिलाई इस्पात संयंत्र में कर्मचारियों के मनोबल, कार्य-प्रेरणा और समर्पण को सम्मान देने वाला प्रतिष्ठित नेहरू अवॉर्ड एक बार फिर चर्चा में है,
  • लेकिन इस बार किसी सम्मान समारोह के कारण नहीं, बल्कि उसकी अनिश्चितता और देरी को लेकर।
  • नवंबर 2025 से लेकर जनवरी 2026 तक का समय बीत जाने के बावजूद नेहरू अवॉर्ड 2025 को लेकर अब तक न तो नामित कर्मचारियों की सूची जारी की गई है और न ही प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की गई है, जिसके कारण कर्मचारियों के बीच असमंजस और निराशा का माहौल बनता जा रहा है।
  • आइए जानते है पूरा मामला👇

दिसंबर 2024 में हुआ था आख़िरी नेहरू अवॉर्ड वितरण!

👉आखिरी बार नेहरू पुरस्कार वितरण समारोह-2024 का आयोजन 23 दिसंबर 2024 को नेहरू सांस्कृतिक सदन, सेक्टर-1, भिलाई में विधिवत रूप से किया गया था।

👉इस समारोह में कुल 572 कर्मिकों एवं अधिकारियों को सम्मानित किया गया था, जिनमें 33 अधिकारियों को जवाहर पुरस्कार, 65 कर्मियों को नेहरू पुरस्कार तथा 62 समूहों में 474 कर्मचारियों को जवाहरलाल नेहरू समूह पुरस्कार प्रदान किया गया था।


नेहरू अवॉर्ड 2025 को लेकर बढ़ती अनिश्चितता!

👉जब वर्ष 2024 में पुरस्कार वितरण पूरी पारदर्शिता और औपचारिकता के साथ किया गया था, तो स्वाभाविक रूप से कर्मचारियों को यह उम्मीद थी कि वर्ष 2025 में भी नेहरू अवॉर्ड की प्रक्रिया समय पर पूरी होगी।

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👉हालांकि, नवंबर 2025 बीत जाने के बाद दिसंबर और फिर जनवरी 2026 तक कोई सूचना सामने न आने से कर्मचारियों के बीच यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर नेहरू अवॉर्ड 2025 की प्रक्रिया क्यों रुकी हुई है और इसका कारण अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।

👉कर्मचारियों का मानना है कि यदि चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी देरी है, तो प्रबंधन को इस पर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए, ताकि अनावश्यक कयास और अफवाहों पर विराम लग सके।


विश्वकर्मा अवॉर्ड बंद होने की पृष्ठभूमि से बढ़ी चिंता!

👉कर्मचारियों की आशंका का एक बड़ा कारण यह भी है कि इससे पहले विश्वकर्मा अवॉर्ड को भी धीरे-धीरे बंद कर दिया गया था, जिसकी शुरुआत भी पहले देरी और फिर चुप्पी से ही हुई थी।

👉अब नेहरू अवॉर्ड 2025 को लेकर वही स्थिति दोहराए जाने से कर्मचारी यह सोचने पर मजबूर हैं कि कहीं यह सम्मान भी कॉरपोरेट कार्यालयों की फाइलों में ही सीमित न होकर रह जाए और आने वाले समय में पूरी तरह समाप्त न कर दिया जाए।


सम्मान की प्रतीक्षा में हताश होता कार्मिक वर्ग!

👉भिलाई इस्पात संयंत्र का कर्मचारी, अधिकारी पूरे वर्ष कठिन परिस्थितियों में उत्पादन, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और संयंत्र संचालन की जिम्मेदारियों को निभाता है और उसे यह भरोसा रहता है कि उसके उत्कृष्ट योगदान को वर्ष के अंत में किसी न किसी रूप में मान्यता मिलेगी।

👉नेहरू अवॉर्ड जैसे सम्मान केवल एक ट्रॉफी या प्रमाण पत्र नहीं होते, बल्कि वे कर्मचारियों को यह संदेश देते हैं कि उनका परिश्रम देखा जा रहा है और उसकी कद्र की जा रही है।

👉लेकिन इस वर्ष पुरस्कार को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कई कर्मचारी स्वयं को उपेक्षित और हताश महसूस कर रहे हैं, जिसका सीधा असर कार्य-उत्साह और मानसिक संतुलन पर पड़ता है।


प्रबंधन से अपेक्षा: स्थिति स्पष्ट कर विश्वास बहाल करे!

👉कार्मिकों की ओर से यह अपेक्षा की जा रही है कि प्रबंधन इस विषय पर जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करे और यह बताए कि नेहरू अवॉर्ड 2025 की प्रक्रिया किस स्तर पर है।

👉यदि चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो नामित कर्मचारियों की सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए और यदि किसी कारणवश देरी हो रही है, तो उसका स्पष्ट और आधिकारिक कारण साझा किया जाना चाहिए।

👉ऐसा करना न केवल कर्मचारियों का भरोसा बनाए रखने के लिए आवश्यक है, बल्कि संयंत्र की सम्मानजनक कार्यसंस्कृति को बनाए रखने के लिए भी बेहद जरूरी है।


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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज 

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