हमर माटी, हमर रोज़गार! छत्तीसगढ़िया का हक़ पहले — BSP में स्थानीयों को प्राथमिकता दिलाने का उज्ज्वल दत्ता का बड़ा संकल्प!
– DIGITAL BHILAI NEWS – Chhattisgarh Rajyotsav 2025
छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर बीएसपी वर्कर्स यूनियन का बड़ा संकल्प: –“भिलाई इस्पात संयंत्र में स्थानीय युवाओं को ही मिले पहला रोजगार अधिकार”
- छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर भिलाई में आज एक विशेष संदेश गूंजा — “भिलाई इस्पात संयंत्र की पहचान छत्तीसगढ़िया हैं, और इस धरती के युवाओं को ही यहां रोजगार में पहला हक़ मिलना चाहिए।”
- बीएसपी वर्कर्स यूनियन कार्यालय में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में यूनियन अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता ने स्थानीय अस्मिता और रोजगार अधिकार की सशक्त आवाज़ बुलंद की।
- दत्ता ने स्पष्ट कहा — अब समय आ गया है कि शासन-प्रशासन और प्रबंधन यह स्वीकार करे कि BSP में प्राथमिकता स्थानीयों को ही मिलेगी।
- आइये जानते है इस कार्यक्रम में क्या रहा खास ?👇
छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस और स्थानीय अस्मिता
👉1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा मिला।
👉यह दिन सिर्फ उत्सव नहीं — हमारी माटी, पहचान, संस्कृति और संघर्ष की स्मृति है।
👉भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) न केवल छत्तीसगढ़ की औद्योगिक रीढ़ है, बल्कि हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी और पहचान भी।
👉यहां की धरती से निकले श्रमिकों और इंजीनियरों ने BSP को विश्वस्तरीय पहचान दिलाई। इसीलिए — जब स्थानीय युवाओं के अवसर सीमित होने लगते हैं, तो दर्द पूरे छत्तीसगढ़ का होता है।
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शुरुआत: “अरपा पैरी के धार” से भावनात्मक माहौल
👉कार्यक्रम की शुरुआत राज्य गीत — “अरपा पैरी के धार” — से हुई। श्री अजय तमुरिया के मधुर स्वर ने माहौल में अपनत्व घोल दिया।
👉इसके बाद
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श्री कुंते लाल साहू ने छत्तीसगढ़ के महानायकों के संघर्ष का स्मरण कराया।
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श्री पवन साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और जनशक्ति ने पूरे भारत और विश्व को नई पहचान दी
👉कार्यक्रम के बाद पूरा माहौल सिर्फ उत्सव का नहीं —स्वाभिमान का हो चुका था।

मुख्य वक्ता का संदेश:
“भिलाई इस्पात संयंत्र — छत्तीसगढ़ियों का पहला हक़”
👉यूनियन अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता ने अपने उद्बोधन में कहा:
“भिलाई इस्पात संयंत्र छत्तीसगढ़ की पहचान है। यहां रोजगार का पहला अधिकार छत्तीसगढ़ के स्थानीय श्रमिकों और शिक्षित युवाओं का है। लेकिन ठेका व्यवस्था बढ़ने के कारण बाहरी ठेकेदार अपने साथ श्रमिक और स्टाफ लेकर आ रहे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को अवसर नहीं मिल पा रहा। अब बीएसपी वर्कर्स यूनियन यह प्रण लेती है कि किसी भी कीमत पर स्थानीय श्रमिकों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।”
👉उनकी यह घोषणा उपस्थित श्रमिकों में नई ऊर्जा भर गई।

मुद्दा क्या है?
👉हाल के वर्षों में ठेका व्यवस्था में वृद्धि हुई। इसके बाद अधिकतर ठेकेदार अपने शहर-राज्य के श्रमिक लाने लगे।
👉नतीजा —
❗skilled स्थानीय युवक बेरोज़गार
❗परिवारों की आर्थिक सुरक्षा पर असर
❗स्थानीय संस्कृति और समुदाय को नुकसान
👉असंतोष की यह आग — अब शब्दों से आगे संगठित संघर्ष का रूप ले चुकी है।
क्यों ज़रूरी है स्थानीयों को प्राथमिकता?
1) आर्थिक सुरक्षा
स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने से — परिवार मजबूत होते हैं, स्थानीय अर्थव्यवस्था विकसित होती है
2) सामाजिक स्थिरता
स्थानीय लोगों का जीवन-स्तर बढ़ता है, कानून-व्यवस्था बेहतर रहती है।
3) सांस्कृतिक संरक्षण
स्थानीय कार्यबल रहने से, संस्कृति-परंपराएं जीवित रहती हैं।
4) औद्योगिक गुणवत्ता
पीढ़ियों से BSP से जुड़े परिवार, कौशल और अनुभव में प्राकृतिक रूप से दक्ष होते हैं।
यूनियन का संकल्प —
“शब्द नहीं — संघर्ष; विकल्प नहीं — समाधान”
उज्ज्वल दत्ता ने कहा — “यह सिर्फ घोषणा नहीं — हम इसका व्यावहारिक समाधान निकालेंगे। स्थानीय श्रमिकों को प्राथमिकता दिलाने के लिए प्रबंधन और प्रशासन से समन्वय, नीतिगत सुझाव और कानूनी विकल्प भी अपनाए जाएंगे।”
यह संदेश स्पष्ट है —अब आगे आराम नहीं… आवाज़ और कार्रवाई साथ-साथ।

युवाओं की आवाज़: दर्द + उम्मीद
👉प्रोग्राम में वक्ताओं ने बताया कि स्थानीय युवा – आईटीआई, डिप्लोमा, इंजीनियरिंग कर लेने के बाद भी उन्हें वही प्लेसमेंट नहीं मिलता जो बाहर से आए लोगों को मिल जाता है।
“माटी से पढ़े-बढ़े हाथों में काम न होना —पूरे समाज की हार है।”
👉यही भावना —आज बदलकर आशा और एकता में बदल रही है।
कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थिति
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उज्जवल दत्ता (अध्यक्ष), खूबचंद वर्मा (महासचिव), अमित बर्मन, शिव बहादुर सिंह, दिलेश्वर राव, नोहर सिंह गजेन्द्र, जोगा राव, प्रदीप सिंह, विमल कांत पांडे, मनोज डडसेना, कुंते लाल साहू, राजकुमार सिंह, जितेंद्र यादव, आर.के. यादव, दीपेश कुमार चुघ, हर्ष भारद्वाज, लुमेश कुमार, अजय तमुरिया, पवन साहू, संदीप सिंह, रूपेंद्रनाथ वाडबुड़े, रणजीत सिंह, प्रवीण यादव – तथा यूनियन के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
विश्लेषण: क्या बदलेगा छत्तीसगढ़ का भविष्य?
👉भिलाई इस्पात संयंत्र में स्थानीय युवाओं के लिए अवसर सुनिश्चित करना सिर्फ रोजगार का प्रश्न नहीं —यह आर्थिक आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रश्न है।
👉यह प्रयास सफल हुआ तो
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स्थानीय बेरोज़गारी घटेगी
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स्थानीय उद्योग को skilled manpower मिलेगा
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सामाजिक समरसता बढ़ेगी
👉और, छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया सिर्फ नारा नहीं —हकीकत बनेगा।
निष्कर्ष
👉छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर बीएसपी वर्कर्स यूनियन का यह संकल्प एक बड़ी जनभावना को आवाज़ देता है।
👉उज्ज्वल दत्ता का संदेश सीधा, स्पष्ट और जनकेन्द्रित है —
“BSP छत्तीसगढ़ की धड़कन है। इसका पहला हक़ इस मिट्टी के बेटा-बेटियों का है। यही लड़ाई है — और यही हमारा संकल्प।”
👉कार्यक्रम का समापन छत्तीसगढ़ महतारी के जयघोष और स्थानीय युवाओं के अधिकारों की रक्षा के दृढ़ संकल्प के साथ हुआ।
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“आप सभी को छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ “🙏🏻
रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज़

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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