वीर बाबूराव पुलेश्वर शेडमाके को भिलाई स्टील प्लांट ST Employees Association का नमन
– DIGITAL BHILAI NEWS –
Independent Revolutionary Hero “Gondwana’s Lion” Veer Baburao Shedmake Tribute – By BSP ST Employees Association
- 21 अक्टूबर 2025 को, स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी, गोंडवाना के शेर Veer Baburao Pullesur Shedmake (वीर बाबूराव पुलेश्वर शेडमाके) की पुण्यतिथि पर, भिलाई स्टील प्लांट के Scheduled Tribe Employees Welfare Association (BSP ST Employees Welfare Association) ने सुंदर एवं हृदयस्पर्शी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया।
- इस आयोजन में एसोसिएशन के सभी पदाधिकारी और अनेक सदस्यगण उपस्थित रहे।
- 1857 Revolt (First War of Indian Independence) के इस पराक्रमी सेनानी को नमन करते हुए, सदस्यगणों ने उनके बलिदान की गाथा को स्मरण किया और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के रूप में स्थापित करने का संकल्प लिया।
- आइए जानते हैं इस कार्यक्रम की झलक और Veer Baburao Shedmake जी की वीर-और-गौरवपूर्ण गाथा।👇
कार्यक्रम की मुख्य झलक:-
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कार्यक्रम का अध्यक्षता और शुभारंभ किया गया श्री किरण बास्की द्वारा।
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सदस्यों द्वारा वीर बाबूराव की तस्वीर पर पुष्पहार अर्पित कर माल्यार्पण किया गया।
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उपस्थित सदस्यों ने मिलकर उद्घोष किया: “वीर बाबूराव पुलेश्वर शेडमाके अमर रहें!”
- इस अवसर पर समाज-सेवा, आदिवासी कल्याण एवं शिक्षा-प्रसार के संकल्प दोहराए गए।

एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री प्रदीप टोप्पो का सम्बोधन :-
- अध्यक्ष प्रदीप टोप्पो के द्वारा वीर बाबुराव पुलेश्वर शेडमाके की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके जीवनी और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया उन्होंने बताया कि 21 अक्टूबर का दिन – वह अमर तिथि है जब गोंडवाना की धरती का एक सच्चा सपूत, वीर बाबुराव पुलेश्वर शेडमाके ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
- 1858 में चंद्रपुर के खुले मैदान में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के कुचक्र के आगे अडिग खड़े होकर उन्होंने फांसी का कष्ट सहा, लेकिन अपनी मातृभूमि के स्वाभिमान को कभी नहीं झुकने दिया।
- यह दिन केवल शोक का नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है – जहां साहस की ज्वाला आज भी जल रही है।
- उनके बलिदान से प्रेरित होकर हमारा एसोसिएशन अनुसूचित जनजाति कर्मचारियों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है।
- हम संकल्प लेते है – उनकी गाथा को जीवित रखेंगे और आदिवासी समाज के गौरव को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँगे।
- यह कार्यक्रम हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता की रक्षा हर नागरिक का कर्तव्य है।
- महासचिव श्री श्याम सुंदर मुर्मू ने कहा कि यह दिन हमारे लिए इतिहास का नहीं, जीवंत संघर्ष का संदेश है।
- सदस्यों ने संकल्प लिया कि Veer Baburao Shedmake की वीरता की कहानी स्कूल-कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल कराने की मांग की जाएगी।
गोंडवाना के शेर की गौरवगाथा – Veer Baburao Shedmake
जन्म: 12 March 1833, किश्तपुर गांव, अहेरी (गढ़चिरौली, महाराष्ट्र)
बलिदान: 21 October 1858, चंद्रपुर जेल मैदान
👉Veer Baburao Shedmake ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ़ “Jangom Dal” नामक गुरिल्ला दल का गठन किया, जिसमें 400–500 आदिवासी योद्धा शामिल थे।
👉उन्होंने चंदा (वर्तमान Chandrapur) क्षेत्र में तीन बार ब्रिटिश सेना को मात दी —13 मार्च 1858 को नंदगांव घोसरी में, 19 अप्रैल को सगनापुर में और 27 अप्रैल को बामनपेट में।
👉अंततः 18 सितंबर 1858 को वे गिरफ्तार किए गए और 21 अक्टूबर 1858 को फाँसी दे दी गई। उनके अंतिम शब्द आज भी प्रेरणा देते हैं — “मैं कभी झुकूँगा नहीं, मातृभूमि के लिए जीऊँगा और मरूँगा!”
👉Veer Baburao Shedmake ने केवल ब्रिटिशों से नहीं, बल्कि अपने समाज के हक और अधिकारों के लिए भी संघर्ष किया। वे भारत के पहले Tribal Freedom Fighter के रूप में आज भी आदिवासी गौरव के प्रतीक हैं।
“बाबूराव हमें सिखाते हैं कि स्वतंत्रता और सम्मान के लिए हर लड़ाई मायने रखती है। हमें उनकी गाथा को नई पीढ़ी तक पहुँचाना होगा।”

कार्यक्रम का सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश
👉यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आदिवासी इतिहास के संरक्षण और जनजागरण का प्रतीक था।
आज जब Tribal Community के अधिकार — Land, Forest and Culture Rights — पर कई चुनौतियाँ हैं, तब Veer Baburao की शहादत यह संदेश देती है: “स्वाभिमान से बढ़कर कोई बलिदान नहीं।”
👉बाबुराव पुलेश्वर शेडमाके केवल एक योद्धा नहीं, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक थे। उन्होंने सिद्ध किया कि जंगल की गोद में पलने वाले आदिवासी भी साम्राज्यवाद के सामने अटल दीवार बन सकते हैं।
👉उनकी कहानी इतिहास की किताबों से बाहर निकलकर हमारे खून में दौड़ती है।
👉एसोसिएशन ने संदेश दिया की – वीर बाबूराव पुलेश्वर शेडमाके की पुण्यतिथि को प्रतिवर्ष बड़े उत्साह से मनाया जाए तथा अपने घर-परिवार, समाज में वीर गाथाओं को बताया जाए।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख सदस्य
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श्री प्रदीप टोप्पो – अध्यक्ष
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श्री श्याम सुंदर मुर्मू – महासचिव
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श्री बी.बी. सिंह – उपाध्यक्ष (प्रथम)
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श्री ललित कुमार बघेल – संयुक्त महासचिव (प्रथम)
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श्री घनश्याम सिंह सिदार – संगठन सचिव
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श्री कृष्ण कुमार मुर्मू – संयुक्त संगठन सचिव
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श्री किरण बास्की – जोनल सचिव
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श्री राम सिंह मरकाम, श्री पी.एस. सिदार, श्री लेखराम रावटे, श्री बलराम सिंह ठाकुर — सदस्य
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रिपोर्ट : डिजिटल भिलाई न्यूज़

K.D. एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और वेब स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्हें वेब मीडिया, लोकल अफेयर्स में कई वर्षों का अनुभव है। वे स्टील इंडस्ट्री, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, कर्मचारियों की नीतियों (NPS, EPFO, PRP, Leave Policy) और छत्तीसगढ़ से जुड़ी औद्योगिक खबरों को सरल और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करते हैं। Digital Bhilai News का उद्देश्य है — औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक और जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों को मूल्यवान जानकारी देना। हमारी लेखन शैली रिसर्च-आधारित और विश्लेषणात्मक होती है, जिससे हर खबर में डेटा, पृष्ठभूमि और असर दोनों शामिल रहते हैं। हम भिलाई और विभिन्न संयंत्र से जुड़ी श्रमिकों-कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय आदि की खबरें तथ्यों, विश्लेषण और आधुनिक डिजिटल दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।


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